बक्सर की धरती एक बार फिर राममय हो गई है। शहर के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में रविवार को रामलीला महोत्सव का शुभारंभ हुआ। पूजा-अर्चना और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महंत श्री श्री 1008 राजगोपालाचार्य ‘त्यागी जी’ महाराज ने रामलीला का उद्घाटन किया। समारोह में बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उद्घाटन के बाद वृंदावन से आई मंडली ने नारद मोह लीला का भावपूर्ण मंचन किया।
रामलीला मैदान में शाम ढलते ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। मंच पर धार्मिक अनुष्ठान के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। गणेश पूजन, श्रीराम-जानकी पूजन और आरती के बाद रामलीला के पहले प्रसंग का मंचन किया गया।
वृंदावन के प्रसिद्ध श्री बालकृष्ण रासलीला रामलीला मंडल के कलाकारों ने स्वामी मोहन श्याम भारद्वाज के निर्देशन में नारद मोह की लीला प्रस्तुत की।
नारद मोह प्रसंग में देवर्षि नारद के तप और भक्ति से लेकर मोह और अहंकार तक की कथा को कलाकारों ने मंच पर जीवंत किया। भगवान विष्णु की लीला के जरिए यह संदेश दिया गया कि भक्ति के साथ विनम्रता भी जरूरी है और अहंकार व्यक्ति को सत्य से दूर कर देता है।
मंचन के दौरान रामलीला मैदान में मौजूद दर्शक धार्मिक वातावरण में पूरी तरह डूबे नजर आए। बीच-बीच में जय श्रीराम और धार्मिक जयकारों से पूरा परिसर गूंजता रहा।
उद्घाटन समारोह में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बक्सर की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बक्सर की रामलीला सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत है, जिसे आगे बढ़ाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
वहीं महंत राजगोपालाचार्य ने बक्सर की धरती को भगवान श्रीराम की स्मृतियों से जुड़ा बताते हुए कहा कि रामलीला और कृष्णलीला समाज को संस्कार और सद्मार्ग का संदेश देने वाली परंपरा हैं।
कार्यक्रम में विधान पार्षद जीवन कुमार और नगर परिषद की मुख्य पार्षद कमरूनिशा विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद रहीं। समिति के अध्यक्ष रमेश गोयल की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम का संचालन कोषाध्यक्ष सह प्रवक्ता सुरेश संगम ने किया। समिति के पदाधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में सामाजिक, राजनीतिक और व्यवसायिक क्षेत्र से जुड़े लोग भी समारोह में पहुंचे।
बक्सर की रामलीला की खासियत यही है कि यहां मंच पर सिर्फ रामायण की कथा नहीं दिखाई जाती, बल्कि हर प्रसंग के जरिए समाज को एक संदेश देने की कोशिश होती है। पहले दिन नारद मोह की लीला के साथ इस धार्मिक आयोजन का आगाज हो चुका है। अब आने वाले दिनों में रामजन्म से लेकर वनवास, सीता हरण, लंका दहन और राम-रावण युद्ध तक के प्रसंग दर्शकों के सामने प्रस्तुत किए जाएंगे।

Post a Comment